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Thursday, 4 April 2013

दो वर्ष पूरे ...



दो वर्ष पूरे ....

आप लोगों के प्रेम तथा सहयोग से आज मेरे ब्लांग अभिव्यंजना को पूरे दो वर्ष हो गए हैं । देखते ही देखते समय कैसे गुजर जाता है पता ही नहीं चलता । वास्तव में मेरा ये सफर बहुत ही रोमांचक सुकून भरा तथा बहुत ही अनुभव से परिपूर्ण रहा है  और रहेगा भी क्यों नहीं जिसे आप जैसे मित्र बंधु ,प्रेरक तथा सहयोगी जनों का समय समय पर स्नेह तथा मार्ग दर्शन मिलता रहा हो...
मैं आप सभी के स्नेह और प्यार का दामन को पकड़े चल रही हूँ । आज मेरे ब्लांग के १५५ अनुसरण कर्ता हैं तथा अब तक की ९५ प्रविष्ठियों में 3272  टिप्पणियाँ हैं, जो मेरे पोस्ट की शोभा ही नहीं, बल्कि मेरी हिम्मत और हौसला भी बढ़ा रही हैं ।

   सच में मैं उन सभी जनों की शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मेरे ब्लांग का अनुसरण कर तथा टिप्पणियों के माध्यम से समय समय पर मेरा उत्साह बढ़ाया ,  इतना ही नहीं कभी चर्चा मंच पर स्थान दिया तो कभी हलचल का हिस्सा बनाया, कभी ब्लांग बुलेटन पर तथा कभी लिंक लिंक्खाड़ पर मेरे ब्लांग को सजाया । मैं उन टीमों के  सभी सदस्यों की ह्रदय से पुन:आभार प्रकट करती हूँ..
    मेरी आप सभी से विनती है आगे भी इसी तरह स्नेह और प्रेम बनाएं रखे. ।आप सभी की दी हुई टिप्पणियों तथा सुझाव मुझे आगे बढ़ने के लिए उर्जा देती है ....
   एक बार फिर से आप सभी का पुन:आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद देती हूँ..


चल पड़ी  थी इस डगर पर कुछ
 घबराते, कुछ डरते डरते
सोचती थी पता नहीं
 मंजिल मिलेगी भी या नहीं.
पर तभी हौसलो ने मेरी अंगुली थामी और
 विश्वास ने मुझे राह दिखाया
और मैं चल पड़ी.. .....
.चलती रही....बस चलती रही ...
क्यों कि आप सभी का प्यार
 और विश्वास मेरे साथ जो है

********
 महेश्वरी कनेरी  
        

Monday, 1 April 2013

सतरंगी संसार

सतरंगी संसार


 आँखों में बसे हैं मेरे 

 सतरंगी एक संसार

खोल कर आँखेँ ,बिखरने दूँ कैसे,

यही तो है मेरे जीने का आधार

              महेश्वरी कनेरी

Thursday, 14 March 2013

देव आशीष


देव आशीष
अचरज़ भरे खोल नयन,
टुकुर टुकुर देख वो मुस्काया
उतर कर नन्हा चाँद जैसे
 गोदी में मेरे आ समाया
झूम झूमकर ,चूम रहा
 मस्तक पवन भी इठलाके
भोर ने भी किया स्वागत
 किरणों की थाल सजाके
सरस अनुभूति का
 अहसास जगा विहल मन में
खिल उठा नवल धूप
 आज फिर मेरे आँगन में
धन्य हुई ,नत मस्तक हूँ
 पाकर ये आशीष तुम्हारा
कोटि-कोटि नमन प्रभु ,
सब में बसा स्वरूप तुम्हारा
****************
महेश्वरी कनेरी
मित्रों आज बहुत समय बाद वापस ब्लांग जगत में लौटकर आई हूँ..कारण .मेरे घर एक नन्हा सा मेहमान मेरा पोता आया है. जिसने मेरे वक्त को अपने ही इर्द गिर्द
चारों तरफ घेर कर रख दिया..चाह कर भी समय निकाल नहीं पारही हूँ.शायद यही है मोह माया का बधंन.....लेकिन ये बंधन भी बहुत प्यारा लगता है..

Tuesday, 22 January 2013

ये दिन

ये दिन



रोज 
सुनहरी किरणों के संग आता है दिन

ढलते सूरज के संग गुजर जाता है दिन

रोज नई तारीखों को ले लाता है दिन

मुट्ठी में रेत सा फिसल जाता है दिन

आँखों में कल के सपने सजाता है दिन

वर्तमान में अतीत के पन्ने पलटता है दिन

मुश्किल घड़ियों में थम जाता है दिन

व्यस्थता में पंक्षी सा उड़ जाता है दिन

पल-पल नया इतिहास रच जाता है दिन

कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन

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महेश्वरी कनेरी

Tuesday, 15 January 2013

ज्वाला बनकर दमको




इस तरह, घुटनो में सर छुपाकर

आँखो से आँसू बहा कर

क्या होगा..?

उठो ! बदल डालो अपनी इस छबि को

बन कर दुर्गा काली

संघर्ष का तुम बिगुल बजादो

उठा लो, हाथों में हौसलों का तलवार

और करो दुराचारियों का संहार

फिर कभी कोई दुष्कर्म का साहस न कर सके

कर दो नष्ट इस रक्त बीज को

फिर कभी कोई दुर्भाव न पनप सके

तुम एक शक्ति हो,खुद को पहचानो

ज्वाला बनकर दमको

भीतर एक आग जगाओ

पड़ने वाले हर कुदृष्टि को

भस्म कर डालो

कोई कृष्ण नहीं आयेगे

खुद को खुद ही बचाना होगा

लेकर हाथों में मशाल

कर लो खुद से एक वादा

बदल डालो इस भ्रष्ट समाज को

जिससे हर स्त्री,निर्भयता से

कही भी आजा सकें

फिर कभी किसी बेटी की

अस्मिता न लूटे

किसी का घर न टूटे

फिर कभी कोई ऐसा

    दर्द भरा हादसा न उभरे

******************


दिसम्बर में हुए एक शर्मनाक घटना से दुखी मन अभी तक नही उभर नहीं सका है..सरकार का कब तक मुँह देखे ..आज भी हर रोज ऐसे हादसे जगह-जगह पर बेखौफ होरहे है ..अब हमें मिल कर खुद ही कुछ करना होगा.. 

                               महेश्वरी कनेरी

नोट:… कृपया मेरे नए ब्लांग  http://balmankirahe.blogspot.in/  मे भी पधारे ..

 बच्चों के लिए कुछ बाल गीत ..सुने.. आभार

Wednesday, 2 January 2013

स्वागत नव वर्ष




खुशियों का दीप जला कर,

उम्मीदों की झोली फैला कर

करते स्वागत नव वर्ष तुम्हारा

हर्षदायिनी, मंगलमयी, शुभकारिणी

हो हर चरण तुम्हारा

स्वागत-स्वागत नव वर्ष तुम्हारा

हिम्मत देना ,चाहत देना

देना अथाह शक्ति दान

निज स्वार्थ भूला कर,

कर सकूँ जन कल्याण

नव सृजन का बहे नित धारा

स्वागत-स्वागत नव वर्ष तुम्हारा

स्वप्न न रूठे ,उम्मीद न टूटे

 धरा में नित नव चेतन जागे

प्रेरणा बन बहे हर शब्द मेरे

नव रश्मि गीत बन रहे नित आगे

अंधकार हरे राह बने उजियारा

स्वागत-स्वागत नव वर्ष तुम्हारा

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महेश्वरी कनेरी