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| मेरे घनश्याम सलोने |
अवतरित हुए तुम आज
मेरे घनश्याम सलोने
अँजली भर-भर लाए नीर
तपित हिये की प्यास बुझाने
कब से तरसे व्याकुल
चातक मन अकुलाए
देख हर्षित तरंग उठे
कंपित अधर मुस्काए
धुले कलुष मन आज
भर-भर अश्रु बहाए
करते निर्मल जग को
पतित पावन कहलाए
हर्षित हुआ मन उपवन
आशा के पल्लव जागे
भाव बहे जीवन चले
घनश्याम जब तुम आए
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महेश्वरी कनेरी






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