माँ का आंचल
आज माँ का आंचल
डरा सा सहमा क्यों है ?
देकर जन्म बेटी को
पछताया
सा क्यों है ?
प्यार दिया, दुलार
दिया
दी ममता की छांव सघन
पर देन सके बेटी को
सुरक्षित एक आंगन
एक अनजाना सा डर
हर पल सांस अटकती है
जब भी
बेटी घर से
बाहर निकलती है
बेखौफ से घूम रहे हैं
ये
दरिन्दे कौन हैं ?
अस्मिता लुट रही
बेटी की
क्यों कानून यूं मौन हैं ?
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महेश्वरी कनेरी
