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| केदारनाथ |
त्रासदी की वो रात…
भयानक खौफनाक मंज़र
विनाश
का अद्भूद सैलाब
देखते ही देखते सब तबाह होगया
क्रूर काल के हाथों सब स्वाह होगया
चीखते चिल्लाते हजारों जिन्दगी जलमग्न हुई
ले
डूबा हजारों ख्वाहिशें, हजारों ख्वाब
गाँव के गाँव बह गए
दुकान, मकान,घर,बस्तियाँ
सब मलवे का ढेर बन कर रह गए
दम तोड़ गई कितनी की चाहते,
कितनों के सपने….
जहाँ चारों पहर भक्तों की भीड़,
मुखरित होता शंख नाद ,
घंटियों की टनटनाहट
जय-जयकार का मधुर स्वर
गूँजता
आज वहाँ मातम ही मातम
अब तो उम्मीद भी लाशों की ढेर पर बैठी
आँसू बहा रही है..
किसकी नज़र लग गई ,
मेरे उत्तराखंड़ को
जो खण्ड-खण्ड हो गया
डरे हुए हर मन के भीतर
आज कई अनबुझ से प्रश्न
उलझ कर रह गए..
ऐसा क्यों हुआ..?????
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महेश्वरी कनेरी
