abhivainjana


Click here for Myspace Layouts

Followers

Tuesday, 23 July 2013

अहसास...

अहसास


माँ

ह्रदय में वात्सल्य का सागर

होठों में दुलार की मुस्कान

आँखों में ममता के आँसू

यही तो है माँ की पहचान


रंग

रंगों का संसार निराला है

हर रंग में खुद को ढ़ाला है

कुछ रंग से खुशी चुराई

कुछ रंग में दर्द को पाला है


धुँआ

कहीं कोई चिंगारी नहीं

हर सांस पर जुल्म का पहरा

सब तरफ धूँआ ही धुँआ

जितना उभरते उतना ही गहरा


बागवान

मन के धरातल में

जब भी हसरतों के फूल खिलते हैं

अपना ही बागवान नोंच कर बिखेर देता है


जुल्म

हादसों की इस ज़मीन पर

हर रोज़ जुल्म उगा करते हैं

जुल्म के इन पौधे से

दर्द और आँसू ही बहा करते हैं


जलती लौ

पिघलते मोम की जलती लौ हूँ

कब पिघल कर ढल जाऊँ

जब तक सांस है तन पर


तब तक जलती ही जाऊँ


***************

महेश्वरी कनेरी
.

Wednesday, 17 July 2013

कदम धरती पर ,मन में आसमान हो.

स्वाति

बेटी स्वाति को उसके जन्म दिन पर शुभकामनाएं

फूल सी महको.काँटों से भी प्यार करो

अँधेरी रात में दीया बन जलती रहो

राह भी तुम हो, मंजिल भी तुम बनो

पंछी सा उडान भरो,हौसला बुलंद करो 

मन में धीरज धरो, कर्मवीर बनो

लक्ष साधो, अर्जुन का तीर बनो

थाम लो वक्त को, फिर आगे बढ़ो

बन कर चुनौती नया कुछ ऐसा करो

कदम धरती पर ,मन में आसमान हो

मुश्किल कुछ नही ,गर दिल में तूफान हो

    **********

    महेश्वरी कनेरी

Friday, 12 July 2013

बोलते चित्र

बादल


नदी


पहाड़




लाशें


आसमान
**********

  महेश्वरी कनेरी

Wednesday, 10 July 2013

ये कैसा सावन..

ये कैसा सावन..
नील गगन
धरती मगन
बरसता सावन
अति मनभावन
हर्षित मन हुआ चन्दन
नाचे तन मन
भीगा आँगन
खिला मन-उपवन
बहे निर्मल पवन
टूटा यादों का बंधन
मन हुआ क्रंदन
लाख किया जतन
माने वियोगी मन

ये कैसा सावन..?
********
महेश्वरी कनेरी

Tuesday, 2 July 2013

त्रासदी की वो रात…

केदारनाथ

त्रासदी की वो रात

भयानक खौफनाक मंज़र

विनाश का अद्भूद सैलाब

देखते ही देखते सब तबाह होगया

क्रूर काल के हाथों सब स्वाह होगया

चीखते चिल्लाते हजारों जिन्दगी जलमग्न हुई

ले डूबा हजारों ख्वाहिशें, हजारों ख्वाब

गाँव के गाँव बह गए

दुकान, मकान,घर,बस्तियाँ

सब मलवे का ढेर बन कर रह गए

दम तोड़ गई कितनी की चाहते,

कितनों के सपने….

जहाँ चारों पहर भक्तों की भीड़,

मुखरित होता शंख नाद ,

घंटियों की टनटनाहट

जय-जयकार का मधुर स्वर गूँजता

आज वहाँ मातम ही मातम

अब तो उम्मीद भी लाशों की ढेर पर बैठी

आँसू बहा रही है..

किसकी नज़र लग गई ,

मेरे उत्तराखंड़ को

जो खण्ड-खण्ड हो गया

डरे हुए हर मन के भीतर

आज कई अनबुझ से प्रश्न

उलझ कर रह गए..

ऐसा क्यों हुआ..?????


****************

महेश्वरी कनेरी

Tuesday, 28 May 2013

ज़रा अज़मां कर देखिए ...




ज़रा अज़मां कर देखिए


बहुत कुछ बाकी है अभी,ज़रा अज़मां कर देखिए

जिन्दगी के हर रंग को जरा पास जाकर देखिए

अफ़सोस न होगा कभी उम्र के गुजर जाने की

कभी बच्चों के संग बच्चा बन कर तो देखिए

छोड़ खामोशी और तन्हाई के इस आलम को

कभी आसमां को सिर पर उठा कर तो देखिए

अपने दुःख-दर्द को भूल जाना चाहो अगर

तो किसी दुखी को गले से लगाकर तो देखिए

इतनी मासूमियत से कभी खुद को न देखिए

जब भी आईना देखे तो मुस्कुरा कर ही देखिए

खुशबू चमन में फैलाना चाहो अगर कभी

बस एक फूल को ज़रा हँसा कर तो देखिए

***************

महेश्वरी कनेरी 



Sunday, 19 May 2013

हम भी चुनौती बन गए ज़माने के लिए…..( मेरी १००वी पोस्ट )


                   मेरी  १००वी  पोस्ट 

         हम भी चुनौती बन गए ज़माने के लिए…..


 दर्द का सैलाब बन कर उठा

हमें मिटाने के लिए

हम भी चुनौती बन गए

ज़माने के लिए…..

वक्त की हर चाल हम पर

तिरछी पड़ती रही

हादसे पर हादसे होते रहे

हमें झुकाने के लिए

हम भी चुनौती बन गए

ज़माने के लिए…..

आँसू पीकर भी हम मुस्काते रहे

खुशी का ज़ज्बा जुटाते रहे

पता था वो तो जि़द्द में बैठे थे

हमें रुलाने के लिए

हम भी चुनौती बन गए

ज़माने के लिए…..

रास्ते और भी तो हैं

हम तो साथ चले थे सिर्फ

साथ निभाने के लिए

हम भी चुनौती बन गए

ज़माने के लिए…..

सुना था बंद मुठ्ठी लाख की

खुली तो खाक की

हमने तो मुट्ठी खोली ही नहीं

खुद को भरमाने के लिए

हम भी चुनौती बन गए

ज़माने के लिए…..

सब कुछ नही मिलता ज़माने में

जो मिला माथे से लगा लिया

बस थोडी सी दुआ चाहिए

जि़न्दगी बिताने के लिए

हम भी चुनौती बन गए

ज़माने के लिए……..

*************

आज मैं अपनी १००वी  पोस्ट  प्रकाशित करते हुए आप सब के प्रति आभारी हूँ..आप सब की 

शुभकामनाएं  प्यार और स्नेह के कारण मुझे ऐसा सुअवसर मिला..आगे भी ऐसे ही अपना स्नेह 

बनाए रखना...


महेश्वरी कनेरी