abhivainjana


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Wednesday, 10 July 2013

ये कैसा सावन..

ये कैसा सावन..
नील गगन
धरती मगन
बरसता सावन
अति मनभावन
हर्षित मन हुआ चन्दन
नाचे तन मन
भीगा आँगन
खिला मन-उपवन
बहे निर्मल पवन
टूटा यादों का बंधन
मन हुआ क्रंदन
लाख किया जतन
माने वियोगी मन

ये कैसा सावन..?
********
महेश्वरी कनेरी

30 comments:

  1. बाहर भी सावन,भीतर भी सावन....

    सुन्दर रचना..
    सादर
    अनु

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  2. सावन में मन का भीगना ..
    सुन्दर कविता.

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  3. बहुत सुंदर रचना, आभार

    यहाँ भी पधारे
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

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  4. बेहद सुंदर रचना.

    रामराम.

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  5. आनन्द बरसाता सावन..सुन्दर पंक्तियाँ..

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  6. बहुत सुंदर और सार्थक अभिव्यक्ति
    सादर

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  7. बहुत भावपूर्ण रचना...

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  8. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन चर्चा मे है मेट्रो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  9. पिया बिना सूखा सावन.........बहुत सुन्दर ।

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  10. सुंदर भाव सजाये है ......
    शुभकामनायें!

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  11. कोमल भावो की और मर्मस्पर्शी.. अभिवयक्ति ....

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  12. बहुत सुंदर भाव से भरे सावन गीत.... सुंदर रचना ...

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  13. मनभावन रचना ...

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  14. बहुत सुन्दर रचना | बधाई

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  15. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11/07/2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

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  16. टूटा यादों का बंधन
    मन हुआ क्रंदन
    लाख किया जतन
    माने न वियोगी मन
    bahut hi khoobsoorat rachana lagi ......aabhar maheshwri ji .

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  17. बहुत सुंदर, अच्छी रचना
    क्या बात



    कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री असली चेहरा : पढिए रोजनामचा
    http://dailyreportsonline.blogspot.in/2013/07/like.html#comment-form

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  18. वाह !!! बहुत उम्दा,सुंदर सावन मनभावन, लाजबाब प्रस्तुति,,,

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  19. This comment has been removed by the author.

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  20. सुंदर प्रस्तुति...
    मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 12-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



    जय हिंद जय भारत...


    मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...

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    Replies
    1. आभार कुलदीप जी....

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  21. बहुत खूब ... ये सावन ऐसे ही आग लगाता है ...
    बहुत कुछ समेट के लिख दिया इस सुन्दर गीत में ...

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  22. सावन तो सावन है बरसेगा...दिल दीवाना फिर भी तरसेगा...

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  23. कुछ सिखाती समझाती कविता...... बहुत सुंदर भाव

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  24. सावन कैसा ही क्यों न हो, दिल में रुमानी जज़्बात तो पैदा कर ही देता है...

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  25. ये कैसा सावन..
    नील गगन
    धरती मगन
    बरसता सावन
    अति मनभावन

    bahut khoob ....!!

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  26. बहुत सुंदर …साव्न की जैसे
    आपको समर्पित .........

    ये कैसा सावन
    उलझाये मन
    बढाये तपन
    महकी पवन
    न लाया साजन
    ये कैसा सावन
    - शिखा

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  27. कोमल भाव लिए भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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