abhivainjana


Click here for Myspace Layouts

Followers

Tuesday, 28 January 2014

मौन जब मुखरित हो जाता है…..

मौन जब मुखरित हो
शब्दों में ढल जाता है
मिट जाते भ्रम सभी
मन दर्पण हो जाता है ।
मौन जब मुखरित हो जाता है…..
बोझिल मन शान्त हो
सागर सा लहराता है
वेदना सब हवा होजाती
भोर दस्तक देजाता है ।
मौन जब मुखरित हो जाता है…..
धैर्य मन का सघन हो
विश्वास सबल हो जाता है
पतझड़ मन बसंत बन
कोकिल सा किलकाता है ।
मौन जब मुखरित हो जाता है…..
सुखद अहसासों से भर
ह्रदय पुलकित होजाता है
विचारों में पंख लग जाते
नया इतिहास रच जाता है ।
मौन जब मुखरित हो जाता है…..


*****************

महेश्वरी कनेरी

31 comments:

  1. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आप का..

      Delete
  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार रविकर जी..

      Delete
  3. बहुत भावपूर्ण रचना...

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर पोस्ट |

    ReplyDelete
  5. अंततः मौन कुछ न कुछ जरूर कहता है

    ReplyDelete
  6. पतझड़ मन बसंत बन
    कोकिल सा किलकाता है ।
    मौन जब मुखरित हो जाता है…
    सच्ची दीदी
    खूबसूरत अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  7. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने...

    ReplyDelete
  8. सच कहा दी....
    मौन बड़ी घुटन पैदा करता है..मुखरित होते ही ह्रदय पुलकित होता है..
    सुन्दर रचना
    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  9. नया इतिहास रच जाता है ।
    मौन जब मुखरित हो जाता है….
    निशब्द भाषा … बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  10. बहुत ही सुंदर भावपूर्ण रचना ...

    ReplyDelete
  11. बहुत सुन्दर रचना.
    New Post : The Helpless God

    ReplyDelete
  12. उत्कृष्ट भाव....मौन मुखरित हो सब कह जाता है .....

    ReplyDelete
  13. आपकी इस प्रस्तुति को आज की लाला लाजपत राय जी की 149 वीं जयंती और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    ReplyDelete
  14. बहुत खूबसूरत !
    मौन जब मन में ही दबा रहता है
    शब्दों के उबाल से हृदय
    ज्वालामुखी बन जाता है !
    इस लावे का बाहर निकल जाना ही श्रेयस्कर है ! बहुत सार्थक रचना !

    ReplyDelete
  15. मौन बुनने लगा सपने..

    ReplyDelete
  16. बहुत ही बढ़िया आंटी


    सादर

    ReplyDelete
  17. बहुत सुंदर भाव ....

    ReplyDelete
  18. मौन जब मुखर होता है तो वाकई सुखद होता है
    सुन्दर सार्थक रचना
    सादर !

    ReplyDelete
  19. मौन का मुखरित होना सुखद होता है..
    बहुत ही सुन्दर और मनभावन रचना..
    :-)

    ReplyDelete
  20. बहुत सुंदर रचना ......!

    ReplyDelete
  21. मौन की अपनी अभिव्यक्ति है.. एक अध्यात्मिक आनन्द!
    बहुत सुन्दर रचना!!

    ReplyDelete
  22. मौन से जो शब्द फूटते हैं..गहरा अर्थ होता है उनमें...

    ReplyDelete
  23. बहुत ही सशक्त और सुंदर रचना.

    रामराम.

    ReplyDelete
  24. मौन जब मुखरित हो
    शब्दों में ढल जाता है
    मिट जाते भ्रम सभी
    मन दर्पण हो जाता है ।
    मौन जब मुखरित हो जाता है ..... सशक्‍त भाव संयोजन
    अनुपम अभिव्‍यक्ति

    ReplyDelete
  25. मन दर्पण हो जाता है !!
    वाह !!

    ReplyDelete
  26. पतझड़ मन बसंत बन
    कोकिल सा किलकाता है ।
    मौन जब मुखरित हो जाता है…..

    बहुत सुंदर रचना माहेश्वरी जी ....!!हृदय किलकाती हुई ...!!

    ReplyDelete