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Monday, 6 August 2012

पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा




एक आग सी जलती थी मुझ में
आज राख का एक ढ़ेर हूँ मैं
मत छेड़ना इसे तुम
वरना सब कुछ बिखर जाएगा
पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

अलमस्त सा उड़ता था गगन में
आज पंखहीन सा लाचार हूँ मैं
मत पूछना कुछ मुझे तुम
वरना दर्द फिर जाग जाएगा
पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

एक खुशनुमा इमारत था कभी मैं
आज खंडहर बन गया हूँ मैं
मत छूना इसे कभी तुम
वरना गिरकर ढह जाएगा
पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

वक्त का कफ़न ओढ़े
मौत से लड़ रहा हूँ मै
रोकना मत मुझे तुम
वरना मौत फिर जीत जाएगा
पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
*******************
महेश्वरी कनेरी

37 comments:

  1. वक्त की हर शै गुलाम...!
    अच्छी रचना लिखी है आपने!

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  2. सशक्त और प्रभावशाली रचना.....

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  3. बहुत सुन्दर....
    गहन अभिव्यक्ति...

    दी खंडर लिखा गया है खंडहर की जगह...
    सादर
    अनु

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  4. सुंदर अभिव्यक्ति !!!
    वक्त बीतने के साथ सब कुछ बदल जाता है और इंसान कुछ नहीं कर पाता

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  5. बहुत बढिया
    हकीकत को बयां करती रचना

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  6. कभी कभी वक्त अपने साथ
    चीजो कि काया पलट हि कर देता है...
    गहन भाव व्यक्त करती रचना...

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  7. वक्त का कफ़न ओढ़े
    मौत से लड़ रहा हूँ मै
    रोकना मत मुझे तुम
    वरना मौत फिर जीत जाएगा
    पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

    बहुत बढ़िया आंटी!

    सादर

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  8. वक्त बदल रहा तेजी से,फिर न लौट के आएगा
    जो भी पैदा हुआ यहाँ,एक दिन वो मिट जाएगा,,,,

    सशक्त,प्रभावशाली रचना.....
    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

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  9. बढ़िया प्रस्तुति |
    बधाई ||

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    Replies
    1. ईश्वर आपको लम्बी उम्र दे-
      स्वस्थ रहें सानंद रहें -

      वक्त वक्त की बात है, बढ़िया था वह दौर |
      समय बदलता जा रहा, कुछ बदलेगा और |
      कुछ बदलेगा और, आग से राख हुई जो |
      पानी धूप बयार, प्यार से तनिक छुई जो |
      मिट जायेगा दर्द, सर्द सी सिसकारी में |
      ढक जाएगा गर्द, और फिर लाचारी में |

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  10. समय के पार शरीर निरुत्तर है, मन का साहस अदम्य है..

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  11. जीवन के सर्वसत्य का खूबसूरती से बयां किया है आपने अपनी कविता के माध्यम से. आभार !

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  12. एक खुशनुमा इमारत था कभी मैं
    आज खंडहर बन गया हूँ मैं
    मत छूना इसे कभी तुम
    वरना गिरकर ढह जाएगा
    पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
    sab kushal-mangal hai naa Didi .... ? agar ye kewal kavitaa to ati uttam hai .... :)

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  13. वक्त कभी एक सा नहीं रहता
    बदलाव तो प्रकृति का नियम है .
    सुंदर रचना !
    सादर !

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  14. समय के साथ बदल ही जाता सब कुछ ...गहन अभिव्यक्ति

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  15. सुंदर भावमय गीत.
    अन्यथा न लें तो या पंक्ति "वरना मौत फिर जीत जाएगा" क्या यूँ नहीं हो सकती ?
    मौत का दिल कभी भी मचल जाएगा"

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  16. मौत से लड़ रहा हूँ मै
    रोकना मत मुझे तुम
    वरना मौत फिर जीत जाएगा
    पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
    बहुत खूब ...

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  17. वक्त का कफ़न ओढ़े
    मौत से लड़ रहा हूँ मै
    रोकना मत मुझे तुम
    वरना मौत फिर जीत जाएगा
    पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

    ....बहुत मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण..

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  18. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

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  19. बहुत खूब ... बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  20. सुंदर अभिव्यक्ति .....!!!

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  21. वेदना और करुणा घोल दीं हैं आपने कविता में .मानसिक अवरोध न आये बस ,फिर जो आये सो आये ..हौसले से जिए हारता हौसला है आदमी कभी हारा है .

    ram ram bhai

    मंगलवार, 7 अगस्त 2012

    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

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  22. बहुत सुंदर !!

    ये नामुराद वक्त भी
    पता नहीं
    क्या क्या करवायेगा
    वैसे आदमी का वक्त है
    आदमी ही की तरह
    तो पेश आयेगा !

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  23. बहुत ही बेहतरीन!
    इश्वर से प्रार्थना है कि वक़्त बदल जाए पर आपकी लेखनी ऐसी ही सुन्दर रहे!

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  24. sab kuch badal jata hai samay ke sath par man na badle aapke shabd na badle bas yahi kaamne...bahut gahri vedna likhi hai aapne

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  25. समय हर चीज़ के रूप-रंग को बदल देता है. इसमें कड़ुवी यादों को मिटा देने की भी शक्ति है. सुंदर कविता.

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  26. वक्त सदा एक सा नहीं रहता..यही तो सत्य है

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  27. सुंदर गीत... चिंतनीय भी....
    सादर।

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  28. बहुत सुन्दर..!!

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  29. वक्त कब कैसे बदलता है सच मे पता नहीं चलता बहुत सुन्दर रचना !

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  30. डॉ. जेन्नी शबनम has left a new comment on my post "पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा":

    वक्त का बदलना तब पता चलता है जब हठात ज़िंदगी चौंकाती है... सुदर प्रवाहमय अभिव्यक्ति, बधाई.

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  31. वक्त ऐसे बदल जाएगा...किसको पता होता है..चेताने के लिए आभार..

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  32. समय के साथ सब बदल जाता है गहन भाव अभिव्यक्ति

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