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Saturday, 21 July 2012

भोर की पहली किरण

भोर की पहली किरण 

अँधेरी रात की
 काली चादर को चीर
भोर की पहली किरण
जब धरती पर आई
सारी धरती सिन्दूरी रंग में रंगी
नव वधु सी शरमाई
शीतल मंद पवन ने छेड़ा
फिर जीवन का राग सुहाना
हिम शैल शिखर से फिसलती किरणें
घाटी पर आ सुस्ताई
अलसाई कलियों ने आँखें खोली
देख गुंजित भँवरे मुस्काए
रात कहर से भीगी थी
जो पलके फूलों की
चूम-चूम किरण
उनको सहलाए
निकले नीड़ से आतुर पंछी
स्वच्छंद गगन पर पंख फैलाए
दूर कहीं मंदिर की घंटी
मधुर ध्वनि से मुझे बुलाती
सत्यम शिवम सुन्दरम ,बस
यही भोर है मुझको भाती
यही भोर बस मुझे सुहाती 
******************
महेश्वरी कनेरी 

48 comments:

  1. सत्यम शिवम सुन्दरम..की अनहद नाद की तरह सुन्दर रचना..बधाई..

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  2. बहुत सुन्दर रचना......जैसे सुबह का कोई राग.....
    सादर
    अनु

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  3. भोर की सुहानी किरण सबका मन हर्षित कर देती है...जैसा आपकी कविता ने किया.

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  4. निकले नीड़ से आतुर पंछी
    स्वच्छंद गगन पर पंख फैलाए
    दूर कहीं मंदिर की घंटी
    मधुर ध्वनि से मुझे बुलाती ||

    बढ़िया प्रस्तुती |
    सटीक ||
    बधाई ||

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  5. शीतल मंद पवन ने छेड़ा
    फिर जीवन का राग सुहाना
    हिम शैल शिखर से फिसलती किरणें
    घाटी पर आ सुस्ताई

    प्रकृति की छटाएँ बिखेरती सुंदर कविता.

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  6. एक ऊर्जा और पवित्रता भर देती है भोर की पहली किरण

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  7. बहुत सुंदर ....ऊर्जा प्रदान करने वाली रचना

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  8. खुबसूरत अभिवयक्ति......

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  9. बहुत सुन्दर चित्रण किया है इस रचना में |सुन्दर शब्द चयन और अभिव्यक्ति |
    आशा

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  10. सारी धरती सुंदूरी रंग में रंगी
    नव वधु सी शरमाई
    शीतल मंद पवन ने छेड़ा
    फिर जीवन का राग सुहाना

    सुन्दर प्रकृति का चित्रण

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  11. सुहानी सुबह ....!!
    सुंदर रचना ..

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  12. सुंदूरी रंग में रंगी
    नव वधु सी शरमाई
    सुबह का सुन्दर चित्रण...

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  13. मनमोहक रचना .....ऊर्जा और उत्साह लिए आती भोर की बात ....

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  14. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के  चर्चा मंच  पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    Replies
    1. धन्यवाद शास्त्री जी..आभार आप का

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  15. शिवं सुन्दरं चित्रण

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  16. बहुत खूबसूरत भोर दिखाई है
    मेरी आँखे अभी भी अलसाई हैं !

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  17. भोर का सुंदर चित्रण इस सुंदर गीत द्वारा अनुपम है. शुक्रिया आपका.

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  18. भोर की उजली किरण जैसी आपकी रचना ने दिल मोह लिए महेश्वरी जी बहुत खूब

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  19. यही भोर मुझे भी अच्छी लगती है
    सुंदर चित्र उकेरा है आपने भोर का ...
    सादर !

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  20. बहुत सुन्दर सिंदूरी सुबह का
    अद्दभुत वर्णन..
    बहुत सुन्दर मनभावन रचना..
    :-) :-) :-) ;-)

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  21. निकले नीड़ से आतुर पंछी
    स्वच्छंद गगन पर पंख फैलाए
    दूर कहीं मंदिर की घंटी
    मधुर ध्वनि से मुझे बुलाती
    सत्यम शिवम सुन्दरम ,बस
    यही भोर है मुझको भाती
    यही भोर बस मुझे सुहाती ... कितनी सुहानी सुबह

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  22. भोर का बेहतरीन शब्द चित्र

    सादर

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  23. प्रकृति की सुंदरता महसूस करने वाली चीज है ..

    बहुत सुंदर प्रसतुति !!

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  24. bahut sunder rachna
    shubhkamnayen

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  25. बहुत ही सुंदर भाव संयोजन से सजी आति सुन्दर रचन...

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  26. सुंदर भोर ! जो है सबको भाती....
    शुभकामनाएँ!

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  27. वाह ... बहुत ही बढिया भावमय करते शब्‍द

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  28. मन में एक सात्विक ऊर्जा जगाती बहुत सुन्दर और प्रभावी अभिव्यक्ति..

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  29. अँधेरी रात की
    काली चादर को चीर
    भोर की पहली किरण
    जब धरती पर आई
    सारी धरती सुंदूरी रंग में रंगी
    नव वधु सी शरमाई
    सुन्दर मनोहर चित्रण पौ फटने का ,सात्विक सौन्दर्य की छटा बिखेरती रचना .कृपया "सिन्दूरी" कर लें.

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  30. बहुत सुंदर शब्द चित्र खींचा है आपने।

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  31. बहुत सुन्दर भोर का नज़ारा।

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  32. सुन्दर मोहक रचना, बधाई.

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  33. Maheshwari, nicely written.. heart felt.. would love to see many more. also looking forward to your feedback on my poetry..

    Thanks and regards
    Sniel

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  34. बस, यही भोर है मुझको भाती..
    बहुत सुन्दर चित्रण .

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  35. कल 29/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  36. स्वागत हैं ऐसे सुबह का

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  37. मंदिर की घंटी बजाती सी रचना |

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  38. लो रात गई; मुसकाता फिर महि की गोदी स्निग्ध भोर
    है धीर गगन चंचल सुनकर चंचल विहंग का मधुर शोर

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  39. सुप्रभात कहती हुई सुंदर कविता।

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  40. बहुत ही उम्दा कविता |

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  41. भोर की ताज़गी लिए रचना...
    ~सादर !!!

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  42. निकले नीड़ से आतुर पंछी
    स्वच्छंद गगन पर पंख फैलाए

    refreshing lines.. I recalled all the beautiful mornings I had in past..

    Thanks

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