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Thursday, 9 May 2013

नहीं आया जीना मुझे ...




 आखिरी कगार पर खड़ी  जिन्दगी कहती है मुझसे 
"सब कुछ तो सीख लिया  तुमनें,पर
जीना न सीख पाई अभी "
माना की, जीना भी एक कला है 
पर  हर कला में हर कोई पारंगत तो नहीं होता ..?
यही सोच-सोच , खुद को समझा लेती थी  मैं 
कई बार खुद को तराशने की भी कोशिश  की थी मैंने
पर ,हर  बार वक्त के  औज़ार मुझे जंक  में डूबे   हुए  मिले 
और कई बार तो  उनकी धार इतनी तेज  और चमकदार होती  
कि  डर कर दुबक जाती थी मैं 
 इसी लिए  कभी खुद को तराश न पाई मैं
और  नहीं आया जीना मुझे 
 तिल -तिल कर मरती रही मैं 
सिर्फ जीने के लिए ......
हां सिर्फ जीने के लिए.....मरती रही मैं ...मरती रही मैं 

**********************
महेश्वरी कनेरी 

23 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (10-05-2013) के "मेरी विवशता" (चर्चा मंच-1240) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. और कई बार तो उनकी धार इतनी तेज और चमकदार होती
    कि डर कर दुबक जाती थी मैं
    इसी लिए कभी खुद को तराश न पाई मैं
    और नहीं आया जीना मुझे
    तिल -तिल कर मरती रही मैं
    सिर्फ जीने के लिए ......
    हां सिर्फ जीने के लिए.....मरती रही मैं ...मरती रही मैं


    सटीक अभिव्‍यक्ति !!

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  3. जीवन के अंतिम पड़ाव के दर्द को लिए हुए लेखनी

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  4. बहुत सुंदर !

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  5. अपने अन्दर झांकने पर यही प्रश्न आता है कि क्यों नहीं सीखा ?

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  6. मन के भावों को व्यक्त करती सुन्दर रचना..

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  7. हां सिर्फ जीने के लिए.....मरती रही मैं ...मरती रही मैं
    भावमय करते शब्‍द ...
    सादर

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  8. बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति !
    latest post'वनफूल'
    latest postअनुभूति : क्षणिकाएं

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  9. तुषार राज रस्तोगी has left a new comment on post "नहीं आया जीना मुझे ...":

    आपकी यह पोस्ट आज के (०९ मई, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - ख़्वाब पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  10. अरुणा has left a new comment on your post "नहीं आया जीना मुझे ...":

    जीना नहीं सीखा अंतिम पड़ाव तक .........बेहद सुन्दर

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  11. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति...

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  12. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 12/05/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  13. जब जीवन भार सम्हालना सीख जायेगी, चलना भी आ जायेगा।

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  14. वैसे तो आज के चलन देख के लगता है अगर इसी को जीना कहते हैं तो अगर नहीं सीखे तो अच्छा ही है ... जितना आसानी से नासमजी से जीवन कटे उतना ही अच्छा ...

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  15. jisne marna seekh liya jeene ka adhikar usi ko hai ...bahut badhiya ....

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  16. जीने के लिए मारती रही ... बहुत भावपूर्ण रचना

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  17. नहीं आया जीना मुझे .....बहुत ही भाव-प्रधान सोचने को मजबूर करती रचना

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  18. भावपूर्ण सुंदर रचना !

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  19. आखिरी कगार पर खड़ी जिन्दगी कहती है मुझसे
    "सब कुछ तो सीख लिया तुमनें,पर
    जीना न सीख पाई अभी "

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  20. आखिरी कगार पर खड़ी जिन्दगी कहती है मुझसे
    "सब कुछ तो सीख लिया तुमनें,पर
    जीना न सीख पाई अभी "-----
    भावपूर्ण सुंदर रचना
    सादर

    आग्रह है पढ़ें "अम्मा" मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    http://jyoti-khare.blogspot.in

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  21. बहुत कम लोग होते हैं जो जीवन जीने की कला में पारंगत होते हैं...बहुत ही सुंदर एवं सार्थक रचना।

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