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Tuesday, 22 January 2013

ये दिन

ये दिन



रोज 
सुनहरी किरणों के संग आता है दिन

ढलते सूरज के संग गुजर जाता है दिन

रोज नई तारीखों को ले लाता है दिन

मुट्ठी में रेत सा फिसल जाता है दिन

आँखों में कल के सपने सजाता है दिन

वर्तमान में अतीत के पन्ने पलटता है दिन

मुश्किल घड़ियों में थम जाता है दिन

व्यस्थता में पंक्षी सा उड़ जाता है दिन

पल-पल नया इतिहास रच जाता है दिन

कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन

 *************

महेश्वरी कनेरी

34 comments:

  1. एक दिन के बीत जाने के बाद ....अगले दिन के इंतज़ार में

    बेहद खूबसूरत प्रस्तुति

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  2. एक दिन बिक जायेगा माट्टी के मोल जग में रह जाएँगे प्यारे तेरे बोल....

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  3. बहुत सुन्दर रचना।।हर दिन सुन्दर और शांतिभरा हो।
    शुभकामनाएँ ....
    :-)

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  4. पल-पल नया इतिहास रच जाता है दिन

    कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन

    वाह दीदी :) बहुत खूब !!

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  5. बढ़िया है दीदी |
    आभार-

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (23-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | अवश्य पधारें |
    सूचनार्थ |

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  7. बहुत सुंदर रचना
    बहुत बढिया

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  8. वर्तमान में अतीत के पन्ने पलटता है दिन'
    कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन '

    बहुत सही कहा..ऐसे अहसास भी आते हैं मन में जिन्हें आप ने खूबसूरत अभिव्यक्ति दी है.

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  9. "मुठ्ठी भर रेत सा फिसल जाता है दिन "
    बहुत सुन्दर रचना और यहाँ पंक्ति

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  10. यादों को धरोहर दे जाता है दिन.......कभी कभी कुछ अमर कर जाता है दिन.......सुन्दर पंक्तियाँ रच जाता है दिन ....साभार !

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  11. bahut sundar abhiwykti hai ......

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  12. मुश्किल घड़ियों में थम जाता है दिन

    व्यस्थता में पंक्षी सा उड़ जाता है दिन


    bahut sundar rachana ke sadar badhai sweekaren ..

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  13. यूँ ही दिन के साथ महीने और साल और फिर जीवन बीत जाता है....
    सुन्दर रचना दी.

    सादर
    अनु

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  14. हर किसी के लिए एक अलग अनुभव और एक अलग जिंदगी ले कर आता है दिन...सुन्दर पोस्ट।

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  15. सही कहा है आपने यही एक दिन भूत, वर्तमान, भविष्य का रचियता है... सुन्दर रचना... आभार

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  16. हर दिन एक नई शुरुआत...सुंदर रचना !

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  17. बिल्कुल सच कहा है..हर दिन एक नया रूप लेकर आता है..

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  18. हर दिन जीवन का अंग बना,
    आधार बना, रस रंग बना,
    रात बिसारी, पुनः कार्य में,
    लगता, प्रबल प्रंसग बना।

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  19. हर दिन नया सवेरा लाता है ... सुंदर प्रस्तुति

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  20. मुश्किल घड़ियों में थम जाता है दिन

    व्यस्थता में पंक्षी सा उड़ जाता है दिन

    पल-पल नया इतिहास रच जाता है दिन

    कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन

    अद्भुत निःशब्द करती भावनाए

    एक एक पल का लेखा जोखा बतलाता दिन

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  21. खूबसूरत भाव बेहतरीन अभिव्यक्ति,,,,,

    recent post: गुलामी का असर,,,

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  22. वर्तमान में अतीत के पन्ने पलटता है दिन'
    कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन '
    sunder likha hai bahut hi sunder
    rachana

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  23. मुट्ठी में रेत सा फिसल जाता है दिन
    कर्मठ जनों का संकल्प बन जाता है दिन
    बस इसी कर्मठता का संकल्प जगा रहे .. सुन्दर रचना .. बहुत ही सीख देती हुई।
    सादर
    मधुरेश

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  24. हर दिन रचता नया इतिहास!

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  25. उम्दा प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई...६४वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं...

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  26. हर दिन ले कर आती है एक नयी उम्मीद संग अपने
    सुन्दर रचना
    सादर !

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  27. अति सुन्दर ,भावपूर्ण रचना ...

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  28. बहुत सुन्दर!
    सादर!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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  29. बहुत ही सुन्दर कविता |आभार

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  30. बहुत खूब...!

    दिन पर मैंने कुछ यूं लिखा था-

    रात-रात भर गायब रहता,
    जाने कहां कुंवारा दिन।

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  31. होली मुबारक

    अभी 'प्रहलाद' नहीं हुआ है अर्थात प्रजा का आह्लाद नहीं हुआ है.आह्लाद -खुशी -प्रसन्नता जनता को नसीब नहीं है.करों के भार से ,अपहरण -बलात्कार से,चोरी-डकैती ,लूट-मार से,जनता त्राही-त्राही कर रही है.आज फिर आवश्यकता है -'वराह अवतार' की .वराह=वर+अह =वर यानि अच्छा और अह यानी दिन .इस प्रकार वराह अवतार का मतलब है अच्छा दिन -समय आना.जब जनता जागरूक हो जाती है तो अच्छा समय (दिन) आता है और तभी 'प्रहलाद' का जन्म होता है अर्थात प्रजा का आह्लाद होता है =प्रजा की खुशी होती है.ऐसा होने पर ही हिरण्याक्ष तथा हिरण्य कश्यप का अंत हो जाता है अर्थात शोषण और उत्पीडन समाप्त हो जाता है.

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  32. The refrain " din" is wonderfully expressed and gives so much meaning to the poem.

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