abhivainjana


Click here for Myspace Layouts

Followers

Thursday, 14 June 2012

कमजोर नज़र

कमजोर नज़र



 खोगई है जिन्दगी यहीं कहीं


ढ़ूँढ़ रही हूँ , मिलती ही नहीं


शायद सोच की नज़र ही


कमजोर पड़ गई है…

*****

महेश्वरी कनेरी 



29 comments:

  1. Wah-Wah ---di itni chhoti chhoti paktiyom me kitni gahri baat kah di aapne.
    bahut hi badhiya----
    dhanyvaad sahit
    poonam

    ReplyDelete
  2. मस्त मस्त दो पंक्तियाँ, भरे अनोखे भाव ।

    दीदी बहुत बधाइयां, गूढ़ दृष्टि पा जाव ।।

    ReplyDelete
  3. मिल जाये ज़िन्दगी...!

    ReplyDelete
  4. सुना है अनुभव की नजर तेज होती है...
    आँखों की घटती रोशनी के साथ अनुभव की रोशनी बढ़ती जाती है:)

    ReplyDelete
  5. सही बात है..
    बहुत सुन्दर....

    ReplyDelete
  6. फिर से चर्चा मंच पर, रविकर का उत्साह |

    साजे सुन्दर लिंक सब, बैठ ताकता राह ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच

    ReplyDelete
  7. जिंदगी की खोज सोच की नजर से...
    वाह बहुत सुन्दर... आभार

    ReplyDelete
  8. कम पंक्तियों बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति,,,,,
    नियमित पोस्ट में आने के लिये बहुत२ आभार ,,,

    ReplyDelete
  9. सच है, आयाम सिमटने लगते हैं..

    ReplyDelete
  10. खोगई है जिन्दगी यहीं कहीं
    ढ़ूँढ़ रही हूँ , मिलती ही नहीं
    बहुत खूब दीदी .... !!

    ReplyDelete
  11. बहुत सुन्दर........................

    सादर

    ReplyDelete
  12. या कहीं नहीं है .... !

    ReplyDelete
  13. इससे भी गहरी बात कोई हो सकती है..वाह !

    ReplyDelete
  14. वाह ... बहुत खूब

    ReplyDelete
  15. सोच की कुछ दिशाएँ समय के साथ धुँधला जाती हैं. सुंदर पंक्तियाँ.

    ReplyDelete
  16. कुछ शब्दों में गहन प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  17. इसी खोज में ही जिंदगी छुपी है..

    ReplyDelete
  18. कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया .......आभार

    ReplyDelete
  19. वाह,
    छोटी सी डिबिया में समंदर भर के मोती।

    ReplyDelete
  20. जिंदगी सार यही है. सुंदर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  21. बहुत ही बढ़िया भाव लिए रचना.

    ReplyDelete