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Friday, 23 March 2012

माटी से मिली देह है


       माटी से मिली  देह है

  माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है
  क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

 मोह माया एक जाल है,तृष्णा है भटकाव है
 तोड़ दे इस बंधन को, आगे शीतल छांव है ।   

 मन की आँखे खोल जरा ,जीवन कब अपना है
 एक नाम ही साँचा है,बाकी  सब तो सपना है ।

 खाली हाथ तू आया है, खाली हाथ ही जाना है
 क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है ।
क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।
******
महेश्वरी कनेरी




36 comments:

  1. माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है ।
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

    बहुत खूब आंटी! एकदम सच्ची बात काही है आपने
    नव संवत की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

    सादर

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  2. दीदी के दर्शन मिले, करता दर्शन-पाठ ।
    जो समझा खुशहाल वो, बाढ़े जीवन ठाठ ।


    बाढ़े जीवन ठाठ, सार गीता सा पाया ।
    माटी की कद-काठ, गर्व में किते भुलाया ।

    पञ्च तत्व का मेल, खेल है चार दिनों का ।
    हेल मेल अल्बेल, मिटाओ मेल मनों का ।।

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    Replies
    1. पञ्च तत्व का मेल, खेल है चार दिनों का ।
      हेल मेल अल्बेल, मिटाओ मैल मनों का ।।

      Delete
  3. एक सुन्दर रचना और एक अटल सत्य भी. आभार !
    कबीर की रचना भीमसेन जोशी के स्वर में वर्षों पहले सुनी थी "......ये तन मुण्डना रे, मुण्डना रे, मुण्डना...." आज फिर वह कबीरवाणी याद आ गयी.

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  4. वाह बहुत ही सुंदर भावों और शब्दों से सजायी है आपने अपनी यह रचना नव संवत कि शुभकामनायें....

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  5. माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है ।
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।.....माटी के पुतले काहे को गुमान ?

    सुन्दर रचना है कबीर का फलसफा समझाती -दास कबीर जतन से ओढ़ी,ज्यों की त्यों धर दीन्हीं चदरिया ,झीनी रे झीनी ....

    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai

    बुधवार, 21 मार्च 2012
    गेस्ट आइटम : छंदोबद्ध रचना :दिल्ली के दंगल में अब तो कुश्ती अंतिम होनी है .

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  6. खाली हाथ तू आया है, खाली हाथ ही जाना है
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

    ये सारे ख्याल मन में आते रहते हैं...

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  7. खाली हाथ तू आया है, खाली हाथ ही जाना है
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

    ....काश, यह शास्वत सत्य लोग समझ पाते...बहुत सारगर्भित अभिव्यक्ति...आभार

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  8. ये ही इस जीवन का सार हैं ...

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  9. खाली हाथ आये है और खाली हाथ ही जाना है लेकिन यह जानकर भी हम अपने हाथ हमेशा भरते रहना चाहते हैं--------बहुत ही सुन्दर रचना

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  10. ek sateek rachna khali hath hi aaya khali haath hi jana hai
    yahi jeevan ka sach hai.behtreen abhivyakti.

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  11. मन की आँखे खोल जरा ,जीवन कब अपना है
    एक नाम ही साँचा है,बाकी सब तो सपना है ... jivan ka saar rakh diya

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  12. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन सटीक रचना,......

    my resent post


    काव्यान्जलि ...: अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.

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  13. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    आपको नव सम्वत्सर-2069 की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  14. मोह माया एक जाल है,तृष्णा है भटकाव है
    तोड़ दे इस बंधन को, आगे शीतल छांव है ।

    Bahut Sunder...Sach to yahi hai...

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  15. सत्य को कहती सुंदर भावभिव्यक्ति

    नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें...

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  16. नव संवत्सर का आरंभन सुख शांति समृद्धि का वाहक बने हार्दिक अभिनन्दन नव वर्ष की मंगल शुभकामनायें/ सुन्दर प्रेरक भाव में रचना बधाईयाँ जी /

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  17. जिससे उपजे,
    उसमें जाकर मिल जाना है,
    क्या अपना है,
    इस दुनिया में क्या पाना है?

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  18. बहुत सुन्दर...........

    सादर.

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  19. माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है ।
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

    जीवन का अंतिम... गहन भाव...

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  20. इस ख़ूबसूरत पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें.

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  21. अनमोल वचन.. अति सुन्दर रचना.

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  22. http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/03/5.html

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  23. माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है ।
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।
    अनुपम भाव संयोजन लिए ...उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति ।

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  24. सब यही रह जाना है ।

    बहुत सुंदर रचना....
    सादर।

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  25. उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति ।

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  26. मन की आँखे खोल जरा ,जीवन कब अपना है
    एक नाम ही साँचा है,बाकी सब तो सपना है ।

    उम्दा प्रस्तुति महेश्वरी जी ... !!

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  27. सच इसे माटी में ही मिल जाना है।

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  28. खाली हाथ तू आया है, खाली हाथ ही जाना है
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ।

    जीवन की यही सबसे बड़ी सच्चाई है।
    अच्छी रचना।

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  29. माटी से मिली देह है,माटी में मिल जाना है
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है ...

    जीवन की सच्चाई को सरल सीधे शब्दों में लिख दिया आपने ... बहुत सुन्दर काव्य ...

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  30. नवरात्र के ४दिन की आपको बहुत बहुत सुभकामनाये माँ आपके सपनो को साकार करे
    आप ने अपना कीमती वकत निकल के मेरे ब्लॉग पे आये इस के लिए तहे दिल से मैं आपका शुकर गुजर हु आपका बहुत बहुत धन्यवाद्
    मेरी एक नई मेरा बचपन
    कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन:
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/03/blog-post_23.html
    दिनेश पारीक

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  31. कल 27/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  32. आपने ने तो हकीकत को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया है और उस पर अमल किए जाने की आवश्यकता भी है। किन्तु सराहना मे टिप्पणी लिखने वाले अमल करने को कितना तत्पर हैं?

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  33. खाली हाथ तू आया है, खाली हाथ ही जाना है
    क्या तेरा क्या मेरा ,सब यही रह जाना है

    ...लेकिन सच तो यह है की इंसान की नियत का घड़ा नहीं भरता ..इश्वर ने कहा है ...मैंने इतना दिया है की सबका पेट भर सके ...लेकिन नियत ...उसका तो कोई पारावार नहीं .....!

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  34. बहुत बढ़िया प्रस्तुति !

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