abhivainjana


Click here for Myspace Layouts

Followers

Sunday, 9 October 2011

हथेली पर जान लेके चलने वाले



हथेली पर जान लेके चलने वाले
तूफ़ां से भला कहाँ डरते हैं
हिम्मत का पतवार थामे वे
अपनी राह खुद बना लेते हैं

बिजली बन कर बाधाओ पर
बेखौफ हो  टूट पड़ते हैं
मन में भर कर विश्वास
अग्नि पथ पर वे बढ़ते हैं

न कोसते किस्मत को वे
बिगड़ी खुद बना लेते हैं
दर्द से भरी हर लकीर को वे
खुद हाथों से मिटा देते हैं

धैर्य की भट्टी में तप कर वे
लोहे को मोम बना देते हैं
चल कर तलवार की धार पर
नया इतिहास रचा लेते हैं

हथेली पर जान लेके चलने वाले
तूफ़ां से भला कहाँ डरते हैं..
*******

37 comments:

  1. सुंदर ...धैर्य और आत्मविश्वास से ही नया इतिहास रचा जाता है......

    ReplyDelete
  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    ReplyDelete
  3. सच बात है, ऐसा ही कुछ हो अपने युवाओं में।

    ReplyDelete
  4. हिम्मत का पतवार थामे वे
    अपनी राह खुद बना लेते हैं....
    सचमुच... सार्थक प्रेरक गीत....
    सादर बधाई....

    ReplyDelete
  5. बिजली बन कर बाधाओ पर
    बेखौफ हो टूट पड़ते हैं
    मन में भर कर विश्वास
    अग्नि पथ पर वे बढ़ते हैं

    बहुत उत्साह बढ़ाती है आपकी यह कविता।
    ----
    कल 11/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  6. वाह …………उत्साह का संचार करती एक बेहद खूबसूरत कविता

    ReplyDelete
  7. वाह ...बहुत ही बढि़या लिखा है आपने ...आभार ।

    ReplyDelete
  8. जोश भरती हुई कविता!

    ReplyDelete
  9. न कोसते किस्मत को वे
    बिगड़ी खुद बना लेते हैं
    दर्द से भरी हर लकीर को वे
    खुद हाथों से मिटा देते हैं

    ....बहुत सारगर्भित और प्रेरक प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  10. Very motivating and inspiring creation !

    ReplyDelete
  11. न कोसते किस्मत को वे
    बिगड़ी खुद बना लेते हैं--

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बधाई स्वीकार करें ||

    ReplyDelete
  12. हिम्मत, बुद्धिमता, धैर्य और सहनशीलता आदि गुण ही आदमी को ऊपर उठाती है.... आपकी यह प्रेरणास्पद रचना हौसला बढाती है...
    इस सार्थक व सुन्दर रचना के लिए आभार !!

    ReplyDelete
  13. उत्साह बढ़ाती है आपकी यह कविता.

    ReplyDelete
  14. धैर्य की भट्टी में तप कर वे
    लोहे को मोम बना देते हैं
    चल कर तलवार की धार पर
    नया इतिहास रचा लेते हैं...prerna deti hai aapki yah rachna..sadar badhayee aaur amantran ke sath

    ReplyDelete
  15. Himmat se hi bade-bade kaam siddh hote hain..
    saarthak utsahvardhan rachna prastuti ke liye dhanyavaad!

    ReplyDelete
  16. बहुत अच्छी भावपूर्ण रचना..बधाई स्वीकारें

    नीरज

    ReplyDelete
  17. सार्थक प्रेरक गीत.......

    ReplyDelete
  18. बहुत ख़ूबसूरत एवं प्रेरक रचना! बढ़िया प्रस्तुती!

    ReplyDelete
  19. saarthak aur sandeshprad rachnaa...

    धैर्य की भट्टी में तप कर वे
    लोहे को मोम बना देते हैं
    चल कर तलवार की धार पर
    नया इतिहास रचा लेते हैं

    shubhkaamnaayen.

    ReplyDelete
  20. जी, धीर-वीर मनुष्यों की बात ही और है।

    ReplyDelete
  21. प्रेरणादायी रचना

    ReplyDelete
  22. न कोसते किस्मत को वे
    बिगड़ी खुद बना लेते हैं
    दर्द से भरी हर लकीर को वे
    खुद हाथों से मिटा देते हैं

    भागयवाद की तुलना में कर्मवाद को श्रेष्ठ दर्शाती सुंदर और प्रेरक रचना।

    ReplyDelete
  23. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

    ReplyDelete
  24. ekdam prerak......aur sunder to alag se......

    ReplyDelete
  25. बहुत सुंदर , प्रेरक रचना .....
    शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  26. सकारात्मक सन्देश देती कविता.

    ReplyDelete
  27. जीवन में उत्साह भर देने वाली प्रभावी रचना,मुझे बहुत अच्छी लगी,बधाई समय मिले तो मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है,

    ReplyDelete
  28. सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति.

    ReplyDelete
  29. न कोसते किस्मत को वे
    बिगड़ी खुद बना लेते हैं
    दर्द से भरी हर लकीर को वे
    खुद हाथों से मिटा देते हैं

    सही सन्देश प्रेषित करती प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  30. हिम्मते मर्दा मदद डे खुदा .सहज अभिव्यक्ति प्रेरक और भाग्य वादियों को आइना दिखलाती .

    ReplyDelete
  31. न कोसते किस्मत को वे
    बिगड़ी खुद बना लेते हैं
    दर्द से भरी हर लकीर को वे
    खुद हाथों से मिटा देते हैं
    हथेली पर जान लेके चलने वाले
    तूफ़ां से भला कहाँ डरते हैं..

    बहुत सुंदर रचना..
    लोगों को सकारात्मक प्रेरणा देने वाली..

    ReplyDelete
  32. आज 14/08/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

    ReplyDelete
  33. हां........मन में हैं विश्वास

    ReplyDelete
  34. दर्द से भरी हर लकीर को वे
    खुद हाथों से मिटा देते हैं................बहुत सुंदर रचना............

    ReplyDelete
  35. बहुत ही प्रेरक कविता के लिए बधाई है और अभी खुशी इस बात पर भी हुई कि हमारे चिट्ठे समनामी हैँ ।

    ReplyDelete