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Tuesday, 23 December 2014

माँ के माथे की बिन्दी


माँ के माथे की बिन्दी

गोल बड़ी सी बिन्दी

कान्ति बन,माथे पर

खिलती है बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

सजाती सवाँरती

पहचान बनाती बिन्दी

मान सम्मान

आस्था है बिन्दी

शीतल सहज सरल

कुछ कहती सी बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

थकान मिटा,उर्जा बन

 मुस्काती बिन्दी

पावन पवित्र सतित्व की

 साक्षी है बिन्दी

परंपरा संस्कारों का

आधार है बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी


***********
महेश्वरी कनेरी

19 comments:

  1. माथे की बिंदिया इतनी अर्थपूर्ण इतनी पावन पहले कभी नहीं लगी जितनी इस कविता को पढने के बाद लग रही है.

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  2. बिंदी के ऊपर इतनी सुंदर रचना पहली बार देखी ......

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  3. बहुत सुन्दर...

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25-12-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1838 में दिया गया है
    धन्यवाद

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  5. बहुत ही सुंदर ... बिंदी माथे पर खिलती है और पावन कर देती है ...

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  6. बेहद खुबसूरत अभिव्यक्ति दीदी .... उम्दा रचना

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  7. माँ के माथे की बिन्दी - गरिमामय शृंगार की दीप्ति ,वाह !

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  8. कल 28/दिसंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  9. माथे की बिंदी पर सुन्दर रचना प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  11. बहुत कुछ कह जाती है माँ के माथे की बिंदी...बहुत सुन्दर रचना...

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  12. दिल छु गयी यह प्यारी रचना , आभार आपका !!

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  13. बहुत बढ़िया ...
    नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं!!

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  14. मान सम्मान

    आस्था है बिन्दी

    शीतल सहज सरल

    कुछ कहती सी बिन्दी

    माँ के माथे की बिन्दी
    क्या खूबसूरत शब्द हैं आपके !!

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