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Saturday, 3 May 2014

दीवार


दीवार

आसमां  में कोई सरहद नहीं

फिर धरती को क्यों बाँटा है

ये तो हम और तुम हैं ,जिन्होंने

दिलों को भी दीवार से पाटा है

कहीं नफ़्रत की तो कहीं अहं की

आओ इस दीवार को गिरा कर देखें

कि दिल कितना बड़ा होता है 

*****
महेश्वरी कनेरी

20 comments:

  1. बहुत सुन्दर विचार !

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  2. बहुत हीं सुन्दर ...

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  3. आकाश जितना बड़ा...

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  4. बहुत ही सुन्दर विचार , काश यह दीवारें जल्द ही गिर जाएँ

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  5. अनंत जैसा है दिल..

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  6. bahut sundar baat kahi aapne ....!

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन विश्व हास्य दिवस - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  8. अभी आसमान पर इंसान के नापाक कदम नहीं पड़े हैं शायद इसीलिये आसमान बचा है बँटने से. ईश्वर आपकी प्रार्थना सुन ले यही कामना है! दिल की पुरानी परिभाषा कि सिमटे तो दिले आशिक़ - फैले तो ज़माना है, सही हो सके!!
    बहुत ही अच्छी प्रस्तुति!!

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (05-05-2014) को "मुजरिम हैं पेट के" (चर्चा मंच-1603) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    Replies
    1. आभार शास्त्री जी..

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  10. बहुत सुन्दर बात कही......

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  11. दीवारें हटने पर दिल भी आसमान जैसा विस्तार पालेंगे । बहुत अच्छा भाव और वैसी ही अच्छी कविता ।

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  12. बहुत ही सुंदर विचार, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  13. आओ इस दीवार को गिरा कर देखें
    कि दिल कितना बड़ा होता है

    वाह ! वाऽह…!

    बहुत सुंदर !

    मंगलकामनाओं सहित...

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  14. दीवारें टूटें तो धरती भी आसमान की तरह एकसार हो जायेगी। सुंदर प्रस्तुति।

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  15. जब ये दीवार गिर जायगी ... सब एक हो जायेंगे ... आसमान से ...
    भावपूर्ण ...

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  16. काश ये दीवारें टूट सकें !
    और दिल से दिल मिल सके
    बहुत ही सुन्दर
    सादर !

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  17. waah dil kitna bada hotaa hain

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