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Friday, 11 October 2013

उठो नव निर्माण करो



उठो नव  निर्माण करो

मौत का था तांडव ऐसा

आज भी

ज़र्रा-ज़र्रा काँप रहा

मातम सी खामोशी है

सहमी-सहमी सी घाटी है

जो मर गए ,वो तर गए

जीवित जो निष्प्राण ,

ठगे हुए से खड़े हैं

माना कि दर्द बहुत है

पर कब तक शोक मनाना है

समेट लो दर्द को अपने,

 और उठो….

भाग्य को फिर जगाना है

बुझ गए थे ,चूल्हे जो

उन्हें फिर जलाना है

यूँ रोने से क्या होगा ?

तुम जिन्दा हो

खुद पर विश्वास करो

नव सृजक बन ,प्राण भरो

उठो नव निर्माण करो

तिनका-तिनका चुन कर

फिर घर बसाना है

मरघट को जिन्दा कर,

धरती को सजाना है

तुम शिव हो,तुम ही शक्ति

खुद को पहचानो

जो खोया है,फिर पाओगे

थोडा धीर धरो

नव सृजक बन प्राण भरो

उठो, नव निर्माण करो

नव निर्माण करो

**************
महेश्वरी कनेरी

25 comments:

  1. नव निर्माण हेतु, सतत प्रस्तुत

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  2. सुन्दर प्रस्तुति ....!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (12-10-2013) को "उठो नव निर्माण करो" (चर्चा मंचःअंक-1396) पर भी होगी!
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. यलगार या आवाहन अच्छा लगा
    नारात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  5. माना कि दर्द बहुत है
    पर कब तक शोक मनाना है
    समेट लो दर्द को अपने,
    और उठो….
    भाग्य को फिर जगाना है...

    भावपूर्ण सुंदर अभिव्यक्ति...!
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ ...!

    RECENT POST : अपनी राम कहानी में.

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  6. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति |
    नवनिर्माण हेतु अनथक अविरत संलग्न |

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  7. बहुत ही प्रखर और ओजस्वी रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  8. नव निर्माण की ही तो जरुरत है

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  9. bahut hi sundar rachna ...........navratri ki shubhkamanye.........

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  10. आज की विशेष बुलेटिन जेपी और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

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  11. प्रेरक अभि‍व्‍यक्‍ति

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  12. बेहद आशावादी क्षण :


    समेट लो दर्द को अपने,

    और उठो….

    भाग्य को फिर जगाना है

    बुझ गए थे ,चूल्हे जो

    उन्हें फिर जलाना है

    सुन्दर अति सुन्दर -

    सृजन के क्षण कितने मीठे,

    ध्वंश के कितने कड़वे स्वाद ,

    सृजन है प्रेम सृजन विश्वास।

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  13. एक हृदय विदारक घटना के बाद के चिंतन कर जन संबोधन करती हुई बहुत अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं।

    [url]http://kadaachit.blogspot.in/[/url]

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  14. बहुत सुंदर भाव और प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!

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  15. बहुत ही सुंदर, प्रेरणादायी भाव ....

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  16. नव निर्माण का संदेश हर वक्त की आवाज है...उड़ीसा को भी तूफान का सामना करना है...

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  17. सशक्त और प्रभावशाली रचना.....

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  18. बेहद प्रभावशाली रचना...
    बहुत ही बेहतरीन....
    :-)

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  19. तुम शिव हो,तुम ही शक्ति
    खुद को पहचानो
    जो खोया है,फिर पाओगे
    थोडा धीर धरो
    नव सृजक बन प्राण भरो
    उठो, नव निर्माण करो
    नव निर्माण करो…----

    बेहद प्रभावशाली और विचारपूर्ण रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    सादर

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  20. bahut sunder prastuti. vaicharik abhivyakti!

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  21. सही कहा आपने ...
    आभार !

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  22. वाह बहुत ही सुन्दर |

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