abhivainjana


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Saturday, 3 November 2012

मंज़िल तेरी उस पार है



थकना नहीं ,ओ पंछी मेरे
मंज़िल तेरी उस पार है
पंख फैला ,उड़ता चल
हर सांस में विश्वास भर
उड़ते हुए आकाश पर
कैसी थकन कैसी तपन
भूल तन के पीर को
श्रम से किस्मत बदल
बाधाओं से डरना नहीं
राह में रुकना नहीं
चाहे घनेरी रात हो
लक्ष पर रख कर नज़र
तू चल अपनी डगर
चिंता तज ,मत हो विकल
क्यों बहाता नीर रे ?
छल से बुना संसार है
निकल इस जंजाल से
चलना अभी दूर है
थकना नहीं ओ पंछी मेरे
मंज़िल तेरी उस पार है
***************
महेश्वरी कनेरी

35 comments:

  1. चिंता तज ,मत हो विकल
    क्यों बहाता नीर रे ?
    छल से बुना संसार है
    निकल इस जंजाल से
    चलना अभी दूर है
    थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है

    मन में उत्साह जगाती प्रेरक कविता।

    सादर

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  2. न रुकना यह बीच मझधार है ...
    मंजिल तेरी उस पार है !
    शुभकामनाएँ!

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  3. थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है

    ...बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना...

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  4. बहुत ही सुंदर रचना

    ReplyDelete
  5. एक नया उत्साह भरती रचना ...

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  6. बहुत सुन्दर, प्रेरणादायक है ,बधाई .

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  7. थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है,,,,

    सार्थक भाव पूर्ण पंक्तियाँ,,,,उत्कृष्ट प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST : समय की पुकार है,

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  8. "लक्ष पर रख कर नज़र
    तू चल अपनी डगर
    चिंता तज ,मत हो विकल
    क्यों बहाता नीर रे ?"

    प्रेरित करती सुंदर रचना !

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  9. उत्साह जगाती प्रेरक कविता।

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  10. बहुत सुन्दर.....
    उत्साह बढ़ाती ,मंजिल का पता बताती रचना...

    बहुत प्रेरणादायी...
    सादर
    अनु

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  11. आशा का संचार करती उत्साह जगाती सुन्दर रचना...आभार

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  12. सकारात्मक सोच लिए पंक्तियाँ......

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  13. उड़ते हुए आकाश पर
    कैसी थकन कैसी तपन
    चलना अभी दूर है
    थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है
    दीदी ये तो आप
    मुझे दिलासा दे गईं
    आभार ! सादर !!

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  14. बहुत दूर चलना है, और स्वयं ही रास्ते बनाने हैं .. सुन्दर, प्रेरक रचना के लिए आभार।
    सादर
    मधुरेश

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  15. प्रेरक रचना...जीवन चलने का नाम...चलते रहो सुबहोशाम|

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  16. प्रेरक गीत ..
    थकना नहीं चलते रहो

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  17. जीवन चलने का नाम है..
    चलना सुबह-शाम है....
    प्रेरणादायी अति सुन्दर रचना....
    :-)

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  18. मन को आश्वस्त करती रचना ...सुन्दर माहेश्वरीजी !

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  19. चिंता तज ,मत हो विकल
    क्यों बहाता नीर रे ?
    छल से बुना संसार है
    निकल इस जंजाल से
    चलना अभी दूर है
    थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है

    उत्साह जगाती प्रेरणा देती लाइन

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  20. gar thak gaye to us paar nahi jaa paoge .....galti hogi ak kshan ki par jivn bhar pachhtaoge ...bahut achhi pastuti ...

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  21. आत्म विश्वास को जगाती हुई सुन्दर प्रस्तुति अपने लक्ष्य पर नजर रखो बहुत सुन्दर सीख ।बहुत बहुत बधाई

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  22. थकान हुई तो आकाश दूर होगा,और आकाश को छूने का सामर्थ्य पंखों में है-इसे याद रखो .... मन पंखों को ताजगी मिलेगी

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  23. चलना अभी दूर है
    थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है

    प्रेरणादायी रचना

    ReplyDelete
  24. इस समुद्र के पार बसा तेरा अपना घर।

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  25. जीवन के प्रति सकारात्मक ऊर्जा देती रचना ... बहुत सुंदर

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  26. जीवन-धारा के प्रति उत्साह देती कविता. बहुत सुंदर.

    ReplyDelete
  27. लक्ष पर रख कर नज़र
    तू चल अपनी डगर
    चिंता तज ,मत हो विकल
    क्यों बहाता नीर रे ?
    छल से बुना संसार है

    bahut hi prabhavshali rachana ....abhar.

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  28. थकना नहीं ओ पंछी मेरे
    मंज़िल तेरी उस पार है
    वाह ... बहुत ही अनुपम भाव

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  29. छल से बुना संसार है
    निकल इस जंजाल से...
    लाजवाब ! बहुत खूबसूरत रचना , आभार

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  30. पंछी का प्रतीकात्मक प्रयोग कविता की संप्रेषणीयता को सुगम बना रहा है।
    प्रेरणादायी रचना।

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  31. आपका बयान हमेशा की तरह प्यारा!!

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  32. कल 11/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  33. सौहाद्र का है पर्व दिवाली ,

    मिलजुल के मनाये दिवाली ,

    कोई घर रहे न रौशनी से खाली .

    हैपी दिवाली हैपी दिवाली .
    .

    शुक्रिया आपका
    वीरू भाई .

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  34. थकना नहीं पंछी मेरे ,मंजिल तेरी उस पार hai .

    आस और जोश की सकारात्मक ऊर्जा की रचना ,जीवन को आगे ठेलती सी ,ऊर्ध्व गति देती सी .बधाई .

    ReplyDelete