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Thursday, 24 May 2012

मैं नारी



मैं नारी,
कभी अबला कभी सबला,
कभी शक्ति स्वरुपा, कभी बेचारी
मैं नारी,
कभी माँ ,कभी बेटी बहन ,
कभी सहचरी बन ,रिश्ते निभाती
मैं नारी,
तृण-तृण चुन घर बसाती
निराशा की गहन रातों में
दीया बन जूझती
मैं नारी,
ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
होठों में मुस्कान लिए
 उन्मुक्त कंठ से
मुक्ति का गाना गाती
मैं नारी,
********
महेश्वरी कनेरी


40 comments:

  1. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

    आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच

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  2. प्रकृति की सबसे अनमोल उपहार है नारी..अति सुन्दर रचना..

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  3. मैं नारी.............
    ईश्वर की कृतियों में सबसे प्यारी..................

    सुंदर रचना महेश्वरी जी.

    सादर.

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  4. ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
    होठों में मुस्कान लिए
    उन्मुक्त कंठ से
    मुक्ति का गाना गाती
    मैं नारी,…………बस यही तो है नारी…………सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  5. नारी=न +अरि= जिसका कोई शत्रु न हो। उत्तम भावों की उत्तम प्रस्तुति है इस कविता मे।

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  6. नारी...सभी रिश्तों में मिठास भरती...बहुत प्यारी प्रस्तुति !!!

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  7. ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
    होठों में मुस्कान लिए
    उन्मुक्त कंठ से
    मुक्ति का गाना गाती
    मैं नारी,
    अति सुन्दर रचना

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  8. स्त्री के विभिन्न आयामों को दर्शाती एक भावप्रवण रचना। आभार !

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  9. गर्व का सहज अनुभव।

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  10. नारी का उन्मुक्ता रूपी स्वरूप ....
    मन भाया ...!!
    सुंदर रच्ना ...महेश्वरी जी ...!!

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  11. वाह !!! बेहतरीन रचना...महेश्वरी जी

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  12. होठों में मुस्कान लिए
    उन्मुक्त कंठ से
    मुक्ति का गाना गाती
    मैं नारी,
    सुन्दर रचना...आभार

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  13. सब दुखों की हरता ...ये नारी
    फिर भी रहे ...बेचारी ...क्यों ??
    शुभकामनाएँ!

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  14. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.....

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  15. बहुत सुंदर और सटीक अभिव्यक्ति .... नारी जीवन की धुरी ...फिर भी खुद अधूरी

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  16. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.....शुभकामनाएँ

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  17. ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
    होठों में मुस्कान लिए
    उन्मुक्त कंठ से
    मुक्ति का गाना गाती!!!
    एक साथ कई भावों को जीती नारी !
    सुन्दर !

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  18. Umda kavita.

    औरत की हक़ीक़त Part 4 (प्रेम और वासना की रहस्यमय प...

    http://auratkihaqiqat.blogspot.com/2012/05/part-4-dr-anwer-jamal.html

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  19. यही रही परम्परा
    यही है परम्परा
    ............. सीता बनो या द्रौपदी या आज की तथाकथित जाग्रत नारी - मोल तो चुकाना ही होगा

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  20. जीवन को सँवारते हुए -नारीत्व के विभिन्न रूप. सुन्दर !

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  21. नारी के विभिन्न रूपों और कर्तव्य को दर्शाती सुन्दर अभिव्यक्ति

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  22. ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
    होठों में मुस्कान लिए
    उन्मुक्त कंठ से
    मुक्ति का गाना गाती
    मैं नारी,
    भावमय करते शब्‍द ...

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  23. सहसा नारी होने पर गर्व होने लगा ...सार्थक रचना

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  24. सुन्दर रचना...आभार

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  25. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
    चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
    टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
    मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
    शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

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  26. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

    संकटों में मुस्कुरायी
    अन्तरिक्ष भी नाप आयी
    काल भी से कभी न हारी
    मैं नारी...


    सादर।

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  27. बहुत सुंदर सार्थक ,बेहतरीन रचना,,,,,

    MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि,,,,,सुनहरा कल,,,,,

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  28. तिनके चुन कर घर बनाने वाली ही मुक्ति-गीत गा सकती है. सुंदर रचना.

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  29. सुंदर रचना !

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  30. Akeli khadi hu fir bhi sab par bhari....me nari... :)

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  31. Yes, that is how a woman is ! Great presentation.

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  32. नारे शक्ति है, जो पुरुषों को संबल देती है।

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  33. दीया बन जुझती
    मैं नारी,
    बढिया भाव -वेरेचक प्रस्तुति याद दिलाती हुई मुक्ति गान -हम होंगे कामयाब एक दिन .....कृपया जूझती करलें .

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  34. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट "कबीर" पर आपका स्वागत है । धन्यवाद।

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  35. ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
    होठों में मुस्कान लिए

    नारी तो आधार है सृष्टि का. नारी के बिना सृष्टि भी नहीं.. कुछ भी नहीं..
    सादर
    मधुरेश

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  36. ह्रदय में पीर ,आँखों में नीर
    होठों में मुस्कान लिए
    उन्मुक्त कंठ से
    मुक्ति का गाना गाती
    मैं नारी,

    मुक्ति गान गाती हुई नारी, पर मुक्ति का कोई मार्ग नहीं... हर युग में देख लिया, वही रीति वही नियति. सार्थक रचना, बधाई.

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  37. .बेहतरीन प्रस्‍तुति

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