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Sunday, 6 May 2012

गीत मेरे तुम गाते रहना..

गीत मेरे तुम गाते रहना

मैं रहूँ या न रहूँ

गीत मेरे तुम गाते रहना

 खुशी हो चाहे गम

 यूँ ही गुनगुनाते रहना

 गीत मेरे तुम गाते रहना......

जब सब तरफ उदासी हो

तपित धरती प्यासी हो

सावन की फुहार बन

वहाँ तुम बरस जाना

गीत मेरे तुम गाते रहना.........

 जहाँ बेबसी बिलखती हो

भूख पल-पल सिसकती हो

दो वक्त की रोटी बन

 वहाँ तुम चले आना

गीत मेरे तुम गाते रहना.........

जब सब तरफ अँधेरा हो

दुखों का डेरा हो

नव प्रभात किरण बन

 वहाँ तुम छा जाना

गीत मेरे तुम गाते रहना.........

जिक्र मेरा कहीं आजाए

आँखें नम तब होजाए

हर धडकन में उनकी

यादें बन बस जाना

 गीत मेरे तुम गाते रहना.......

******************

महेश्वरी कनेरी





30 comments:

  1. भावुक कर देने वाली कविता।

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  2. बहुत सुंदर महेश्वरी जी................
    मन को भिगो गयीं आपकी ये पंक्तियाँ.....

    सादर
    अनु

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  3. बहुत सुंदर भाव ..... आभार

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  4. हृदयस्पर्शी रचना .....

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  5. करने को कितना कुछ था,
    किन्तु सिमटता जीवन था,
    बात हृदय की शब्द सूत्र में कह जाता हूँ,
    अनुभव की पीड़ा बरसे, मैं सह जाता हूँ।

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  6. बहुत ही बढ़िया आंटी!


    सादर

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  7. जहाँ बेबसी बिलखती हो

    भूख पल-पल सिसकती हो

    दो वक्त की रोटी बन

    वहाँ तुम चले आना

    गीत मेरे तुम गाते रहना........इस गीत को जीवन देते रहना

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  8. बिलकुल ।

    गीत गाते रहेंगे हम ।।

    आपको बहुत बहुत बधाई ।
    सुन्दर प्रस्तुति ।।

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  9. ्बहुत ही भावप्रवण गीत

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  10. भावनाओं का सागर लिए ... सुन्दर रचना है ...

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  11. बहुत खूब ! सुन्दर प्रस्तुति !

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  12. मन को छूते भाव इस अभिव्‍यक्ति के ...बहुत ही बढिया।

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  13. मर्मस्पर्शी भावपूर्ण कविता...

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  14. भावपूर्ण ,उत्कृष्ट रचना .

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  15. बहूत हि बेहतरीन रचना....
    उत्कृष्ठ भाव से लिखी बेहतरीन रचना.

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  16. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  17. अपनी इस सुन्दर रचना की चर्चा मंगलवार ८/५/१२/ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर देखिये आभार

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  18. कसम तुम्हारी चाहत की है
    गीत मेरे तुम गाते रहना !

    बचपन से ही एक तमन्ना रही है,कि लोग मुझे याद रखें मगर क्या क्या यह संभव होता है ..?
    विरले हैं जिन्हें बाद में कोई याद रखता है ...अपने से ही फुर्सत नहीं हैं दुनियां वालों को ...

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  19. मर्मस्पर्शी भावपूर्ण कविता...

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  20. मैं रहूँ या न रहूँ
    गीत मेरे तुम गाते रहना
    खुशी हो चाहे गम
    यूँ ही गुनगुनाते रहना
    गीत मेरे तुम गाते रहना.....

    बहुत अच्छी दिल को छूती खूबशूरत रचना,..

    RECENT POST....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....

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  21. जिग्र मेरा कहीं आजाए
    आँखें नम तब होजाए
    हर धडकन में उनकी
    यादें बन बस जाना
    गीत मेरे तुम गाते रहना.......आशावादी स्वरों से संसिक्त बेहद आश्वस्त करती रचना उम्मीद का दामन कसके थामे हुए कृपया 'ज़िक्र मेरा कहीं आजाये 'कर लें . .कृपया यहाँ भी पधारें -http://veerubhai1947.blogspot.in/
    मंगलवार, 8 मई 2012
    गोली को मार गोली पियो अनार का रोजाना जूस

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  22. जब सब तरफ उदासी हो

    तपित धरती प्यासी हो

    सावन की फुहार बन

    वहाँ तुम बरस जाना

    गीत मेरे तुम गाते रहना.........

    Lovely creation !

    .

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  23. जहाँ बेबसी बिलखती हो

    भूख पल-पल सिसकती हो

    दो वक्त की रोटी बन

    वहाँ तुम चले आना

    ....बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना....

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  24. आशावादी रचना, बहुत सुन्दर, बधाई.

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  25. जो गीत बेबसों के लिये आशा का दीप बनकर आते हैं वह अमर हो जाते हैं...सुंदर रचना!

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  26. हर धडकन में उनकी


    यादें बन बस जाना


    गीत मेरे तुम गाते रहना.....bahut khoob....

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  27. बहुत सुन्दर भावपूर्ण कविता..

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  28. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    इस बार कुछ हट के - पुस्तक समीक्षा
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
    श्रीमति आशालता सक्सेना का अनकहा सच !!

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  29. निराशा के सागर में भी आस के पन्छी को महफूज़ रखने का सुन्दर सन्देश देती प्यारी रचना
    आभार

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