abhivainjana


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Friday, 10 February 2012

कविता

कविता
अविरल कल-कल
भावों की बहती सरिता
कभी युगों का कभी
मन का दर्पण कविता

सुखद अनुभूति की
सतरंगी संसार कविता
कभी भूखे की रोटी
कभी तलवार की धार कविता

कभी सखी ,कभी बेटी सी
मुखरित प्यार कविता
कभी जीवन का आधार
कभी पतवार कविता

सदियों से गुंजित जग में
जन-जन की आवाज़ कविता
मन में उठते भावों
की परवाज कविता

ह्रदय भूमि में उपजी
लहलहाती गाती कविता
पल्लवित पुष्पित होकर
बढ़ती  जाती कविता
******
महेश्वरी कनेरी


40 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति कनेरी जी, हार्दिक बधाई
    ह्रदय भूमि में उपजी
    लहलहाती गाती कविता
    पल्लवित पुष्पित होकर
    बढ़ती जाती कविता

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  2. रचना भी सुन्दर चित्र भी सुन्दर.

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  3. बहुद सुन्दर रचना
    शब्दों की नदी बन कर अविरल बहती कविता

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  4. ह्रदय भूमि में उपजी
    लहलहाती गाती कविता
    पल्लवित पुष्पित होकर
    बढ़ती जाती कविता
    मन के हर भाव को स्पष्ट करती
    प्यारी सी कविता...... !!

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  5. कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कविता

    सब कुछ कहती कविता .... बहुत ही बढ़िया

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  6. कितने रूप धरती है कविता..

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  7. सब कुछ है कविता... बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति... आभार

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  8. कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कवित, अविरल बहती कविता

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  9. बहुत सुन्दर भाव,,
    कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कविता...

    मनमोहक कविता...
    सादर.

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  10. कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कविता

    वाह ..कविता की सुन्दर परिभाषा .. बहुत अच्छी रचना

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  11. सदियों से गुंजित जग में
    जन-जन की आवाज़ कविता
    मन में उठते भावों
    की परवाज कविता...
    बहुत ही सुंदर भाव संयोजन माहेश्वरी जी कविटी की खूबसूरत परिभाषा ही बन गई खुद एक कविता :)

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  12. bahut sunder kavita.acchee lgee

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  13. बहुत सुन्दर भाव,,
    कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कविता.
    .....
    मन में उठते भावों
    की परवाज कविता

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  14. सुखद अनुभूति की
    सतरंगी संसार कविता
    कभी भूखे की रोटी
    कभी तलवार की धार कविता

    बहुत सही और सच्ची बात कही आंटी।

    सादर

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  15. बहुत ही सुन्दर भाव संयोजन्।

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  16. कोमल भावो की और मर्मस्पर्शी.. अभिवयक्ति .......

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  17. हृदय से निकला सच्चा उद्गार काव्य रूप ग्रहण कर ही लेता है।
    यह रचना भी उसी की एक मिसाल है।

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  18. ह्रदय भूमि में उपजी
    लहलहाती गाती कविता
    पल्लवित पुष्पित होकर
    बढ़ती जाती कविता.

    कविता के विभिन्न रूपों और आयामों को परिभाषित करती बेहद सुंदर प्रस्तुति. बहुत बधाई.

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  19. सदियों से गुंजित जग में
    जन-जन की आवाज कविता
    मन में उठते भावों
    की परवाज कविता

    कविताओं के संसार में सब कुछ समाहित हे।
    बढि़या रचना।

    ReplyDelete
  20. सदियों से गुंजित जग में
    जन-जन की आवाज़ कविता
    मन में उठते भावों
    की परवाज कविता
    मन का आह्लाद ,टूटे साज़ की आवाज़ कविता ,गूंगे का गुड ,'दिग्विजय' की आवाज़ 'कविता ' बहुत अच्छी रचना है ,याद आ गईं ये पंक्तियाँ -

    वियोगी होगा पहला कवि ,आह से निकला होगा गान ,

    निकल कर अधरों से चुपचाप ,बही होगी कविता अनजान .

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  21. मैं अपने सभी मित्र जनो का आभार प्रकट करती हूँ.जिन्होने समय-समय पर मुझे हौसला दिया..

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  22. बेहतरीन कोमल भावों से भरी अभिव्यक्ति!

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  23. प्रशंसनीय भावाभिव्यक्ति.

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  24. अनुपम भाव संयोजन ।

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  25. कविता की व्यापकता को सुंदरता से परिभाषित किया है, सहराहनीय.

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  26. अविरल कल-कल
    भावों की बहती सरिता
    कभी युगों का कभी
    मन का दर्पण कविता

    मनमोहक कविता...
    प्रेमदिवस की शुभकामनाये,

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  27. di
    kavita ko behtreen dhang se ya yun kahen ki sahi v saral shabdon me aapne varnit kiya hai..
    bahut bahut badhai
    poonam

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  28. बहुत अच्छी रचना,सुंदर प्रस्तुति

    MY NEW POST ...कामयाबी...

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  29. सुखद अनुभूति की
    सतरंगी संसार कविता
    कभी भूखे की रोटी
    कभी तलवार की धार कविता

    bhavpoorn sundar rachana ke liye sadar abhar .

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  30. has left a new comment on your post "कविता":

    कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कविता
    ...जहाँ तक जाए नज़र , वही बन जाए कविता



    Posted by रश्मि प्रभा... to अभिव्यंजना at 12 February 2012 05:30

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  31. Posted by mahendra verma to अभिव्यंजना at 11 February 2012 20:33

    has left a new comment on your post "कविता":

    सदियों से गुंजित जग में
    जन-जन की आवाज कविता
    मन में उठते भावों
    की परवाज कविता

    कविताओं के संसार में सब कुछ समाहित हे।
    बढि़या रचना।

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  32. Posted by Anupama Tripathi to अभिव्यंजना at 10 February 2012 09:55 has left a new comment on your post "कविता":

    आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार ११-२-२०१२ को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

    ReplyDelete
  33. "कभी सखी ,कभी बेटी सी
    मुखरित प्यार कविता
    कभी जीवन का आधार
    कभी पतवार कविता"

    बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति!

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  34. देर से आने के लिए'सॉरी'|
    हर क्षेत्र में कविता के महत्व को दर्शाती बहुत सुंदर प्रस्तुति|

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  35. अविरल कल-कल
    भावों की बहती सरिता
    कभी युगों का कभी
    मन का दर्पण कविता

    .....बहुत सुंदर...कविता को बहुत सुंदर परिभाषित किया है..

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  36. आपकी कविता सुन्दर सरस
    और मन को लुभा रही है.
    आनंदमय प्रस्तुति के लिए आभार जी.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

    ReplyDelete
  37. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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