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Saturday, 11 June 2011

हे राह बटोही ...

हे राह बटोही , तू चलता चल
हे राह बटोही , तू चलता चल
जब तक साँस चले, तू चलता चल
रूप बदल- बदल, जग तूझे भरमाएगा
दृढ्ता का देख तेज़, स्वयं झुक जाएगा
 नई उमंग भर मन में ,नई तरंग जगा
 छाँट तंद्रा के बादल,फिर कर्म बोध जगा
सुख हो जाए बोना.दुख बन जाए बिछौना
कर लेना संधि उनसे फिर आगे बढ़ना
जीवन का सूनापन ,जब तूझे खलेगा
हर पथ पर तेरे,आशा का दीप जलेगा
टूटे हर विश्वास को, जोड़्ता चल
हे राह बटोही , तू चलता चल
जब तक साँस चले, तू चलता चल
हे राह बटोही , तू चलता चल...

30 comments:

  1. जीवन चलने का नाम है .आते जाते संघर्षों के साथ हमें एक आशा बनाये रखनी चाहिये और अपने उद्देश्यों को पाने का हर संभव यत्न करना चाहिये.
    बहुत अच्छी कविता लिखी है आपने.
    बटोही शब्द से बच्चन जी की एक कविता भी याद आ गयी-''पूर्व चलने के बटोही बात की पहचान कर ले......शायद इंटर में पढ़ी थी.

    सादर

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  2. प्रेरणादायक सुन्दर रचना .

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  3. आपने बहुत सुन्दर आह्वान गीत लिखा है!

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  4. जीवन का सूनापन ,जब तूझे खलेगा
    हर पथ पर तेरे,आशा का दीप जलेगा
    टूटे हर विश्वास को, जोड़्ता चल
    हे राह बटोही , तू चलता चल

    Sakaratmak Prernadayi bhav.... Bahut Sunder

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  5. बहुत सुन्दर प्रेरणादायक गीत है!
    सादर-
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  6. गहन अनुभूतियों की सुन्दर प्रेरणादायक अभिव्यक्ति ... हार्दिक बधाई.

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  7. पथिक को प्रेरणा और कवि को ऐसे भाव , दोनों मिल जाय तो ऐसी सुँदर सी अभिव्यक्ति का उदभव होता है .

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  8. बहुत मधुर और प्रेरक गीत है. पढ़कर बहुत अच्छा लगा.

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  9. वाह!! आनन्द आ गया...बहुत सुन्दर गीत.

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  10. बहुत सुन्दर सकारात्मक गीत.आपके ब्लॉग की तस्वीर भी बहुत सुन्दर लगी.

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  11. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 14 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच- ५० ..चर्चामंच

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  12. जीवन का सूनापन ,जब तूझे खलेगा
    हर पथ पर तेरे,आशा का दीप जलेगा
    एक सार्थक, सुन्दर व रचनात्मक पोस्ट के लिए आभार. अनेकानेक शुभकामनायें.
    Please follow - baramasa98.blogspot.com

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  13. चरैवेति की प्रेरणादेती सुन्दर रचना .

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  14. कभी न हार बस चलता चल
    प्रेरित करती कविता

    आप भी आइये

    आभार

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  15. बहुत सकारात्मक सोच...बहुत सुन्दर प्रेरक प्रस्तुति..

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  16. मधुर गीत प्रेरणा देता हुवा ... लाजवाब ....

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  17. बहुत सुन्दर, लाजवाब और प्रेरणादायक रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  18. जीवन का सूनापन ,जब तूझे खलेगा
    हर पथ पर तेरे,आशा का दीप जलेगा

    agr is sunepan ka sath naa hota tho ....mujhe nahi lagta hai ham 1sath yaha is manch par hote or sath jude hote

    bahut accha likha hai aaone man ke bhavo ke...aabhar

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  19. जब तक साँस चले
    चाहे कोई जले --
    बिना खले ---
    हर पल |
    चलता चल ||
    चरैवेति-चरैवेति ----

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  20. सुन्दर सार्थक सन्देश देती रचना। आशा ही जीवन है। शुभकामनायें।

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  21. bahut hi prerna dayak kavita pesh kari hai aapne.aapko padh kar accha laga.:):)

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  22. प्रेरणादायक सुन्दर रचना . शुभकामनायें।

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  23. zindgi kee dagar par
    narantar chalte rehne ka
    shubh aahwaan karti
    anupam panktiyaaN...
    sundar rachnaa !!

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  24. वाह ... बहुत खूब, सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

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  25. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  26. इस प्रेरक रचना के लिए साधुवाद स्वीकारें

    नीरज

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  27. जी आपकी रचनाओं को पढने में साहित्य का अलग स्वाद मिलता है। बहुत सुंदर रचना.. खासतौर पर ये पंक्तियां.. जिसमें कुछ संदेश भी है।

    जीवन का सूनापन ,जब तूझे खलेगा
    हर पथ पर तेरे,आशा का दीप जलेगा

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  28. प्रेरक,सुन्दर अभिव्यक्ति ... हार्दिक बधाई

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