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| मैं और मेरी माँ |
जब भी जीवन की कश्ती डगमगाई
माँ तुम बहुत याद आई..
शीतल पवन ने जब भी मुझे छुआ है
तेरे होने का अहसास हुआ है
बहुत कुछ दिया है ,कुछ कमी नहीं है
बस तेरी ममता की छाँव नही है
जब भी सफर में थक कर रुक जाऊँ
तेरे हाथों का सहारा मैं पाऊँ
हर पल साँसो में तुम बसती हो
दुआ बन मेरे संग चलती हो
जि़क्र तेरा आया ,आँखें मेरी भर आई
माँ तुम बहुत याद आई..
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महेश्वरी कनेरी
