मेरी १००वी पोस्ट
हम भी चुनौती बन गए ज़माने के लिए…..
दर्द का सैलाब बन कर उठा
हमें मिटाने के लिए
हम भी चुनौती बन गए
ज़माने के लिए…..
वक्त की हर चाल हम पर
तिरछी पड़ती रही
हादसे पर हादसे होते रहे
हमें झुकाने के लिए
हम भी चुनौती बन गए
ज़माने के लिए…..
आँसू पीकर भी हम मुस्काते रहे
खुशी का ज़ज्बा जुटाते रहे
पता न था वो तो जि़द्द में बैठे थे
हमें रुलाने के लिए
हम भी चुनौती बन गए
ज़माने के लिए…..
रास्ते और भी तो हैं
हम तो साथ चले थे सिर्फ
साथ निभाने के लिए
हम भी चुनौती बन गए
ज़माने के लिए…..
सुना था बंद मुठ्ठी लाख की
खुली तो खाक की
हमने तो मुट्ठी खोली ही नहीं
खुद को भरमाने के लिए
हम भी चुनौती बन गए
ज़माने के लिए…..
सब कुछ नही मिलता ज़माने में
जो मिला माथे से लगा लिया
बस थोडी सी दुआ चाहिए
जि़न्दगी बिताने के लिए
हम भी चुनौती बन गए
ज़माने के लिए……..
*************
आज मैं अपनी १००वी पोस्ट
प्रकाशित करते हुए आप सब के प्रति आभारी हूँ..आप सब की
शुभकामनाएं प्यार और स्नेह के कारण मुझे ऐसा सुअवसर मिला..आगे
भी ऐसे ही अपना स्नेह
बनाए रखना...
महेश्वरी कनेरी




.jpg)
